हिमाचल में मुख्यमंत्री सुक्खू ने चार दिनों में पेंशन भुगतान और मेडिकल प्रतिपूर्ति निपटाने के दिए निर्देश
In Himachal, Chief Minister Sukhu has issued directives
शिमला। In Himachal, Chief Minister Sukhu has issued directives, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सभी विभागाध्यक्षों को अगले चार दिन के भीतर चतुर्थ श्रेणी के पेंशनरों का बकाया भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पेंशनभोगियों और कर्मचारियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति संबंधी मामलों को भी चार दिनों के भीतर यानी सोमवार तक निपटाने को कहा है।
बुधवार को मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। सचिवालय में आयोजित बैठक में पेंशनरों की 14 सूत्रीय मांग पत्र पर विस्तृत चर्चा की गई। सीएम सुक्खू की 18 संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ दो घंटे तक बैठक चली।
जुलाई में होगी जेसीसी की बैठक
हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने उनकी जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि पेंशनरों के साथ जेसीसी की बैठक जुलाई महीने में की जाएगी।
डीए की एक किस्त कब मिलेगी?
सूत्रों के मुताबिक सरकार पेंशनरों की लंबित डीए की एक किस्त 15 अगस्त के मौके पर जारी कर सकती है। इसके अलावा संशोधित वेतनमान के बकाया एरियर का भी भुगतान जुलाई महीने में करने की सहमति बनी है। 1-1-2016 से 31-1-2022 तक सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की बकाया राशि का 40 प्रतिशत राशि को 31 जुलाई को देने और शेष राशि को किस्त बार देने बारे सहमति बनी है।
ओपीएस देने के बाद केंद्र ने लगाई बंदिशें
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को लागू करने के लिए बार बार दबाव डाला जा रहा है। सरकार हर स्थिति में ओपीएस के लाभ जारी रखेगी। सरकार के ओपीएस को लागू करने के निर्णय के परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने राज्य को दी जाने वाली 1600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता पर रोक लगा दी है। राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को भी बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन सभी वित्तीय बाधाओं के बावजूद राज्य सरकार पेंशनरों और कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित कर रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान भी मौजूद थे।
31 तक मांगे नहीं मानी तो करेंगे आंदोलन
पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा कि 31 जुलाई तक यदि उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता तो वे आंदोलन पर उतर जाएंगे। बैठक में मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि मांगों को मान लिया जाएगा।
पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति की प्रमुख मांगें
- 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन, पारिवारिक पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण और कम्यूटेशन का पुनरीक्षण कर लंबित एरियर जारी किया जाए।
- 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों को शेष 30 प्रतिशत एरियर भी दिया जाए।
- विभागों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों और पेंशनरों को 15 प्रतिशत डीए जारी किया जाए। 111 माह के लंबित एरियर का भुगतान किया जाए।
- पिछले पांच वर्षों से लंबित मेडिकल प्रतिपूर्ति बिलों के भुगतान के लिए विशेष बजट जारी किया जाए।
- 2016 से पूर्व सेवानिवृत्त पेंशनरों की पेंशन एवं पारिवारिक पेंशन को पे-मैट्रिक्स के 50 और 30 प्रतिशत स्तर पर संशोधित किया जाए।
- एचआरटीसी पेंशनरों को प्रत्येक माह की पहली तारीख को पेंशन दी जाए। 02 अक्टूबर 1974 की अधिसूचना वापस लेकर एचआरटीसी का राज्य परिवहन विभाग में विलय किया जाए।
- एचआरटीसी पेंशनरों के लंबित एरियर राज्य सरकार के पेंशनरों की तर्ज पर जारी किए जाएं तथा 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों को पूरा भुगतान एकमुश्त किया जाए।
- बिजली बोर्ड के पेंशनरों के लंबित पेंशन एरियर और सेवानिवृत्ति लाभ जारी किए जाएं।
- शहरी निकायों के पेंशनरों की पेंशन 1 जनवरी 2016 से संशोधित वेतनमान के अनुसार पुनरीक्षित की जाए।
- स्थानीय निकायों के पेंशनरों को संशोधित वेतनमान के अनुसार सभी वित्तीय लाभ और एरियर जारी किए जाएं।
- स्थानीय निकायों में एचपीएमसी अधिनियम और 1994 व 2006 के सेवा नियम लागू किए जाएं।
- हिमाचल पुलिस पेंशनरों को सेना के जवानों की तर्ज पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए।
- पुलिस कर्मियों के बच्चों को सेना की तर्ज पर रोजगार में आरक्षण दिया जाए।
- वर्ष 1999 की अधिसूचना को पुनर्जीवित कर कॉर्पोरेट क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सरकारी कर्मचारियों के समान पेंशन योजना लागू की जाए और बोर्डों और निगमों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मेडिकल प्रतिपूर्ति सुविधा दी जाए।
ये पदाधिकारी रहे मौजूद
दो घंटे चली बैठक में 18 संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों ने भाग लिया। इसमें सुरेश ठाकुर, महासचिव इंद्र पाल शर्मा, भूपराम वर्मा, बृज लाल ठाकुर, चमन भाटिया, देवी लाल ठाकुर, शिव सिंह सेन, हरमेश राणा, मदन लाल शर्मा, अमोलक राम, नीलम चौहान, गुरदयाल सिंह, रविंद्र सिंह राणा, मोहन लाल ठाकुर, सेन राम नेगी, सेठ राम, दीप राज वर्मा, गंगा राम शर्मा, सुरेन्द्र ठाकुर, हेम सिंह ठाकुर, ओपी चौहान, प्रभु राम वर्मा, सुरेंद्र वर्मा, विनोद सूद, संदेश शर्मा, रमा चंदेल, मीरा ठाकुर ने भाग लिया।